अमेरिका में भारतीय युवाओं ने उठाई आवाज, बालश्रम रोकने और शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग | Former child laborers of India raised their voice in America to stop child labor and promote education

International

oi-Mukesh Pandey

|

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न्‍यूयॉर्क,
22
सितंबर।

अमेरिका
का
न्‍यूयॉर्क
शहर
आज
एक
यादगार
शाम
का
गवाह
बन
गया।
दरअसल,
यहां
भारत
से
आने
वाले
दो
ऐसे
लोगों
ने
वैश्विक
नेताओं
के
सामने
बाल
मजदूरों
की
पीड़ा
को
लेकर
अपनी
बात
रखी,
जो
खुद
कभी
बाल
मजदूर
थे।
इनमें
से
एक
झारखंड
से
आने
वाली
20
साल
की
काजल
कुमारी
थीं
और
एक
राजस्‍थान
में
रह
रहे
22
साल
के
किंशु
कुमार।
यह
ऐतिहासिक
मौका
था
संयुक्‍त
राष्‍ट्र
की
‘ट्रांसफॉर्मिंग
एजुकेशन
समिट’
का।

UN Chil Labor

अमेरिका
में
हुई
‘लॉरिएट्स
एंड
लीडर्स
फॉर
चिल्‍ड्रेन
समिट’
में
नोबेल
विजेताओं
और
वैश्विक
नेताओं
को
संबोधित
करते
हुए
काजल
और
किंशु
ने
बालश्रम,
बाल
विवाह,
बाल
शोषण
और
बच्‍चों
की
शिक्षा
को
लेकर
अपनी
आवाज
बुलंद
की।
उन्‍होंने
कहा,
‘बच्‍चों
के
उज्‍जवल
भविष्‍य
के
लिए
शिक्षा
एक
चाभी
की
तरह
है।
इससे
ही
वे
बालश्रम,
बाल
शोषण,
बाल
विवाह
और
गरीबी
से
बच
सकते
हैं।’
इस
मौके
पर
नोबेल
शांति
पुरस्‍कार
से
सम्‍मानित
लीमा
जीबोवी,
स्‍वीडन
के
पूर्व
प्रधानमंत्री
स्‍टीफन
लोवेन
और
जानी-मानी
बाल
अधिकार
कार्यकर्ता
केरी
कैनेडी
समेत
कई
वैश्विक
हस्तियां
मौजूद
थीं।

‘लॉरिएट्स
एंड
लीडर्स
फॉर
चिल्‍ड्रेन’
दुनियाभर
में
अपनी
तरह
का
इकलौता
मंच
है,
जिसमें
नोबेल
विजेता
और
वैश्विक
नेता,
बच्‍चों
के
मुद्दों
को
लेकर
जुटते
हैं
और
भविष्‍य
की
कार्ययोजना
तय
करते
हैं।
यह
मंच
नोबेल
शांति
पुरस्‍कार
से
सम्‍मानित
कैलाश
सत्‍यार्थी
की
देन
है।
इसका
मकसद
एक
ऐसी
दुनिया
का
निर्माण
करना
है,
जिसमें
सभी
बच्‍चे
सुरक्षित
रहें,
आजाद
रहें,
स्‍वस्‍थ
रहें
और
उन्‍हें
शिक्षा
मिले।

आज
भले
ही
काजल
बाल
मित्र
ग्राम
में
बाल
पंचायत
की
अध्‍यक्ष
है
और
एक
बाल
नेता
के
रूप
में
काम
कर
रही
है
लेकिन
वह
कभी
अभ्रक
खदान(माइका
माइन)
में
बाल
मजदूर
थी।
झारखंड
के
कोडरमा
जिले
के
डोमचांच
गांव
में
एक
बाल
मजदूर
के
रूप
में
काजल
ने
अपने
अनुभव
साझा
करते
हुए
कहा,
‘बालश्रम
और
बाल
विवाह
का
पूरी
दुनिया
से
समूल
उन्‍मूलन
बहुत
जरूरी
है
क्‍योंकि
यह
दोनों
ही
बच्‍चों
के
जीवन
को
बर्बाद
कर
देते
हैं।
यह
बच्‍चों
के
कोमल
मन
और
आत्‍मा
पर
कभी

भूलने
वाले
जख्‍म
देते
हैं।’

काजल
गांव
को
लोगों
को
सरकारी
योजनाओं
से
जोड़ने
की
जिम्‍मेदारी
अपने
कंधों
पर
ले
ली
है।
वे
अब
तक
35
बच्‍चों
को
माइका
माइन
के
बाल
मजदूरी
के
जाल
से
मुक्त
करवा
चुकी
हैं।
काजल
ने
अब
तक
तीन
बाल
विवाह
रुकवाया
है।
कोरोना
काल
में
जब
स्‍कूल
बंद
थे
तब
उसने
बच्‍चों
को
ऑनलाइन
शिक्षा
देने
में
अहम
भूमिका
निभाई।

झारखंड
का
ही
बड़कू
मरांडी
और
चंपा
कुमारी
भी
अंतरराष्‍ट्रीय
मंच
पर
बालश्रम
के
खिलाफ
आवाज
उठा
चुके
हैं।
चंपा
को
इंग्‍लैंड
का
प्रतिष्ठित
डायना
अवॉर्ड
भी
मिला
था।
यह
दोनों
ही
बच्‍चे
पूर्व
में
बाल
मजदूर
रह
चुके
थे।
बचपन
में
काजल,
माइका
माइन
में
ढिबरी
चुनने
का
काम
करने
को
मजबूर
थी
ताकि
अपने
परिवार
की
आर्थिक
मदद
कर
सके।
14
साल
की
उम्र
में
बाल
मित्र
ग्राम
ने
उसे
ढिबरी
चुनने
के
काम
से
निकालकर
स्‍कूल
में
दाखिला
करवाया
गया।

 'मकड़ी' के काटने से स्टूडेंट हो गया 'लकवा'! बेडरूम में जाते ही कांप जाती है लड़की
‘मकड़ी’
के
काटने
से
स्टूडेंट
हो
गया
‘लकवा’!
बेडरूम
में
जाते
ही
कांप
जाती
है
लड़की

दरअसल,
बालमित्र
ग्राम
कैलाश
सत्‍यार्थी
का
एक
अभिनव
सामाजिक
प्रयोग
है।
इसका
उद्देश्य
बच्‍चों
को
शोषण
मुक्‍त
कर
पंचायतों

समुदाय
के
साथ
मिलकर
बच्‍चों
की
शिक्षा

सुरक्षा
तय
करना
है।
ये
खासकर
बच्‍चों
के
प्रति
होने
वाले
अपराधों
जैसे-
बाल
विवाह,
बाल
शोषण,
बाल
मजदूरी,
बंधुआ
मजदूरी

यौन
शोषण
से
बच्‍चों
की
सुरक्षा
करना।

English summary

Former child laborers of India raised their voice in America to stop child labor and promote education

Story first published: Thursday, September 22, 2022, 23:20 [IST]

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