कृष्णा पटेल-नीतीश कुमार की मुलाक़ात के क्या हैं मायने, UP की सियासत पर पड़ेगा असर ? | What is the meaning of meeting with Apna Dal President Krishna Patel-Nitish Kumar

 नीतीश-कृष्णा पटेल के बीच बनी आगे की रणनीति

नीतीश-कृष्णा
पटेल
के
बीच
बनी
आगे
की
रणनीति

सूत्रों
की
माने
तो
बिहार
के
सीएम
नीतीश
कुमार
और
कृष्णा
पटेल
के
बीच
बातचीत
के
दौरान
उनके
यूपी
से
चुनाव
लड़ने
का
मुद्दा
भी
उठा।
यह
वही
कृष्णा
पटेल
हैं
जिनकी
बेटी
पल्लवी
पटेल
ने
यूपी
विधानसभा
चुनाव
के
दौरान
सबसे
बड़ा
उलटफेर
करते
हुए
यूपी
के
दिग्गज
नेता
और
डिप्टी
सीएम
केशव
प्रसाद
मौर्य
को
हरा
दिया
था।
पल्लवी
पटेल
की
इस
धमाकेदार
जीत
की
गूंज
देशभर
में
सुनाई
दी
थी।
यही
वजह
है
कि
अब
नीतीश
कुमार
यूपी
के
पटेल
बाहुल्य
इलाकों
का
समीकरण
समझना
चाह
रहे
हैं।
हालांकि
बैठक
में
क्या
रणनीति
बनी
इसका
अभी
खुलासा
नहीं
हुआ
है।

सोनेलाल पटेल के मित्र रह चुके हैं नीतीश कुमार

सोनेलाल
पटेल
के
मित्र
रह
चुके
हैं
नीतीश
कुमार

हालांकि
पटेल
ने
इस
दौरान
अपने
पति
सोनेलाल
पटेल
के
साथ
उनके
लंबे
संबंध
को
साझा
किया।
पटेल,
जिनकी
बेटी
पल्लवी
ने
इस
साल
की
शुरुआत
में
हुए
विधानसभा
चुनावों
में
भाजपा
के
दिग्गज
और
उत्तर
प्रदेश
के
डिप्टी
सीएम
केशव
प्रसाद
मौर्य
को
हराया
था।
पटेल
ने
कुमार
से
उनके
आधिकारिक
आवास
पर
मुलाकात
की।
कृष्णा
पटेल
ने
कहा
कि
,
“मेरे
पति
की
नीतीश
जी
से
लंबी
दोस्ती
थी।
विपक्षी
एकता
बनाने
के
उनके
प्रयास
सराहनीय
हैं,
हालांकि
यह
हमारी
बैठक
के
एजेंडे
में
नहीं
था।”

अपना दल का एक अलग गुट बीजेपी के साथ

अपना
दल
का
एक
अलग
गुट
बीजेपी
के
साथ

विशेष
रूप
से,
पटेल
की
अलग
हुई
बेटी
अनुप्रिया
एनडीए
की
सहयोगी
और
केंद्रीय
मंत्री
हैं।
अपना
दल
की
स्थापना
पटेल
ने
लगभग
तीन
दशक
पहले
एक
शक्तिशाली
ओबीसी
समूह
कुर्मियों
को
एक
अलग
मंच
प्रदान
करने
के
उद्देश्य
से
की
थी।
उनकी
मृत्यु
के
बाद,
अनुप्रिया
ने
कुछ
समय
के
लिए
पार्टी
का
नेतृत्व
किया,
लेकिन
उपचुनाव
में
अपने
पति
को
टिकट
देने
पर
मतभेदों
के
कारण
परिवार
में
दरार

गई,
जिससे
अपना
दल
में
विभाजन
हो
गया।

राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाना चाहते हैं नीतीश

राष्ट्रीय
राजनीति
में
भूमिका
निभाना
चाहते
हैं
नीतीश

नीतीश
के
साथ
कृष्णा
पटेल
की
मुलाकात
इस
चर्चा
की
पृष्ठभूमि
में
हुई
है
कि
बिहार
के
सबसे
लंबे
समय
तक
सेवा
करने
वाले
मुख्यमंत्री,
जो
राष्ट्रीय
राजनीति
में
भूमिका
निभाने
के
लिए
उत्सुक
हैं,
अगला
लोकसभा
चुनाव
पास
के
राज्य
से
लड़
सकते
हैं।
यूपी
में
जद
(यू)
के
नेताओं
का
विचार
है
कि
कुमार
को
फूलपुर
और
मिर्जापुर
जैसी
कुर्मी
बहुल
सीटों
से
चुनाव
लड़ना
चाहिए,
जिसका
प्रतिनिधित्व
जवाहरलाल
नेहरू
ने
अपने
जीवनकाल
में
किया
था।

आम चुनाव में मोदी की तरह ही दांव खेल सकते हैं नीतीश

आम
चुनाव
में
मोदी
की
तरह
ही
दांव
खेल
सकते
हैं
नीतीश

उधर,
जेडीयू
के
नेताओं
की
माने
तो
नीतीश
की
नजर
यूपी
और
उसमें
भी
खासतौर
से
पूर्वांचल
के
पटेल
समुदाय
पर
है।
पटेलों
का
नेता
बनकर
वो
यूपी
में
एंट्री
मारने
की
तैयारी
में
हैं।
जिस
तरह
मोदी
2014
के
लोकसभा
चुनाव
में
दो
जगहों
से
चुनाव
लड़े
थे
उसी
तरह
नीतीश
कुमार
भी
बिहार
के
साथ
ही
यूपी
से
भी
चुनाव
लड़ने
का
दांव
खेल
सकते
हैं।
जेडीयू
के
रणनीतिकारों
को
लगता
है
कि
पीएम
मोदी
चूंकि
काशी
से
चुनाव
लड़ते
हैं
तो
उससे
सटे
प्रयागराज
के
फूलपुर
की
सीट
को
चुनकर
एक
बड़ा
संदेश
दे
सकते
हैं।

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