चीनी ड्रैगन ने शुरू किया 6th जेनरेशन फाइटर जेट का निर्माण, दुनिया में कहीं भी मचा सकता है तबाही | China started making of 6th generation fighter jet to get edge over america can cause havoc in world

6th जेनरेशन फाइटर जेट का निर्माण

6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
का
निर्माण

हालांकि,
इसी
साल
चीनी
अखबार
साउथ
चायना
मॉर्निंग
पोस्ट
ने
अपनी
एक
रिपोर्ट
में
कहा
था,
कि
छठी
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमानों
के
निर्माण
के
मामले
में
अमेरिका
के
सामने
फिलहाल
चीन
काफी
पीछे
है,
लेकिन
ताजा
रिपोर्ट
में
चीन
ने
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
के
निर्माण
को
लेकर
अहम
घोषणाएं
की
हैं।
इस
फाइटर
जेट
की
सबसे
खास
बात
ये
है,
कि
ये
दुनिया
के
किसी
भी
हिस्से
में
तबाही
मचा
सकती
है,
लेकिन
दुनिया
में
मौजूद
कोई
भी
डिफेंस
सिस्टम
या
रडार
इसे
पकड़
नहीं
सकता
है।
लिहाजा,
अगर
चीन
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
का
निर्माण
कर
लेता
है,
तो
ये
भारत
के
लिए
सबसे
बड़ा
सिरदर्द
साबित
होगा।
हालांकि,
इस
वक्त
कर
सिर्फ
अमेरिका
ही
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
का
निर्माण
कर
रहा
है,
लिहाजा
ये
विमान
कैसा
होगा,
इसको
लेकर
कोई
सटीक
परिभाषा
नहीं
है,
लेकिन
माना
जा
रहा
है,
कि
इस
फाइटर
जेट
में
एडवांस
इमर्जिंग
टेक्नोलॉजी,
जैसे
मॉड्यूलर
डिजाइन,
मशीन
लर्निंग,
आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस,
वर्चुअल
एंड
आगुमेंटेड
रिएलिटी,
ड्रोन
स्वार्म
और
वैकल्पिक
तौर
पर
मानव
क्षमता
भी
शामिल
हो
सकती
है,
यानि
ये
विमान
बिना
पायलट
के
भी
खुद
को
कंट्रोल
कर
सकता
है।

कड़ी मेहनत कर रहा है ड्रैगन

कड़ी
मेहनत
कर
रहा
है
ड्रैगन

यूएस
एयरफोर्स
के
एयर
कॉम्बेट
कमांड
के
प्रमुख
जनरल
मार्क
कैली
ने
एयर
एंड
स्पेस
फोर्सेज
मैग्जीन
से
पिछले
महीने
एक
रिपोर्ट
में
इस
बात
का
जिक्र
किया
था,
कि
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
का
निर्माण
करने
के
लिए
चीन
कड़ी
मेहनत
कर
रहा
है,
और
चीन
का
मकसद
अमेरिका
के
हाइली
क्लासिफाइड
यूएस
नेक्स्ट
जेनरेशन
एयर
डॉमिनेंस
प्रोग्राम
यानि
(NGAD)
प्रोग्राम
को
चुनौती
देना
है।
उन्होंने
कहा
कि,
चीन
की
कोशिश
अमेरिका
को
‘सिस्टम
से
सिस्टम’
चुनौती
देना
है।
इस
साल
सितंबर
महीने
में
अमेरिकी
वायुसेना,
अंतरक्ष
और
साइबर
सम्मेलन
में
बोलते
हुए
जनरल
मार्क
कैली
ने
कहा
कि,
‘चीन
का
मानना
है
कि,
6th
जेनरेशन
एयर
डॉमिनेंस
आधुनिक
सुरक्षा
के
लिए
काफी
ज्यादा
जरूरी
है
और
हर
हाल
में
चीन
के
पास
ये
क्षमता
होनी
चाहिए।’
वहीं,
कैली
ने
सम्मेलन
में
चौंकाते
हुए
कहा
कि,
6
वीं
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमानों
के
विकास
में
अमेरिका
अपने
प्रतिद्वंदी
से
कोई
ज्यादा
आगे
नहीं
है
और
उन्होंने
कहा
कि,
अमेरिका
ज्यादा
से
ज्यादा
सिर्फ
एक
महीने
ही
इस
हथियार
के
निर्माण
में
आगे
है।
मार्क
कैली
ने
चीन
के
फाइटर
प्रोग्राम
का
लोहा
भी
माना
है
और
चीन
की
तुलना
अमेरिका
द्वारा
इस्तेमाल
की
जाने
वाली
leapfrogging
system
से
की
है।

चीन के एयर प्रोग्राम को जानिए

चीन
के
एयर
प्रोग्राम
को
जानिए

सितंबर
महीने
में
ही
‘द
वारजोन’
ने
अपने
एक
लेख
में
डिफेंस
एक्सपर्ट
थॉमस
न्यूडिक
ने
इस
बात
का
जिक्र
किया
था,
कि
चीन
ने
पहले
रूस
से
Su-27
हैवीवेट
लड़ाकू
विमानों
का
अधिग्रहण
किया
था
और
उन
जेट्स
का
इस्तेमाल
इसकी
बेहतर
कॉपी
बनाने
के
लिए
किया
था।
उन्होंने
इस
बात
का
भी
जिक्र
किया,
कि
चीन
ने
रूस
से
Su-27
हैवीवेट
लड़ाकू
विमान
खरीदकर
उसकी
बेहतरीन
कॉपियां
J-15
और
J-16
एडवांस
फाइटर
जेट
तैयार
कर
लिए।
उसने
रूस
से
कॉपी
तैयार
करने
की
इजाजत
ली
थी।
इसके
अलावा,
चीन
ने
रूस
से
Su-35
फाइटर
जेट
भी
खरीदा
है
और
इस
फाइटर
जेट
से
उसने
थ्रस्ट
वेक्टरिंग
इंजन,
इलेक्ट्रॉनिक
वारफेयर
सिस्टम
और
हथियारों
जैसी
5वीं
पीढ़ी
की
टेक्नोलॉजी
की
जानकारियां
कॉपी
की
हैं।
लिहाजा,
एक
संभावना
ये
है,
कि
चीन
जिस
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
का
निर्माण
करेगा,
वो
हो
सकता
है,
टेक्नोलॉजी
के
मामले
में
जे-20
5वीं
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमान
का
अपग्रेड
वर्जन
हो।
आपको
बता
दें
कि,
जे-20
फाइटर
जेट
चीन
का
पांचवी
पीढ़ी
का
लड़ाकू
विमान
है।
इसके
अलावा
एशिया
टाइम्स
की
एक
पुरानी
रिपोर्ट
में
कहा
गया
था
कि,
भविष्य
में
J-20
फाइटर
जेट
को
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
के
तौर
पर
अपग्रेड
किया
जा
सकता
है,
जिसमें
डायरेक्टेड
एनर्जी
वीपन
और
वैकल्पिक
रूप
से
मानव
क्षमता
के
साथ
एडवांस
किया
जा
सकता
है।

चीन के सामने समस्याएं क्या हैं?

चीन
के
सामने
समस्याएं
क्या
हैं?

हालांकि,
चीन
के
सामने
6th
जेनरेशन
फाइटर
जेट
को
लेकर
कई
चुनौतियां
भी
हैं
और
जेट
इंजन
के
निर्माण
में
आने
वाली
बाधाएं
चीन
के
इस
प्रोग्राम
के
सामने
की
सबसे
बड़ी
चुनौती
है।
चीनी
मॉडल
कथित
तौर
पर
कम
जीवनकाल
और
कम
पावर
ऑउटपुट
से
पीड़ित
हैं।
नतीजतन,
चीन
को
अपने
जे-20
फाइटर
जेट
के
इंजन
निर्माण
के
लिए
रूस
पर
निर्भर
रहना
पड़ता
है
और
रूस
के
पास
तेजी
से
चीनी
जरूरतों
को
पूरा
करने
की
क्षमता
नहीं
हैं,
क्योंकि
वो
पश्चिमी
देशों
के
प्रतिबंधों
से
बंधा
हुआ
है।
वहीं,
रूसी
इंजन
अपेक्षाकृत
कमजोर
होते
हैं,
लिहाजा
चीन
के
सामने
सबसे
बड़ी
दिक्कत
उसके
हाइटेक
विमानों
के
निर्माण
में
रूसी
आपूर्ति
ऋृंखला
में
दिक्कतों
का
आना
है।
हालांकि,
चीन
अपने
इस
सबसे
बड़ी
दिक्कत
को
दूर
करने
की
लगातार
कोशिश
कर
रहा
है
और
मार्च
2022
में
साउथ
चायना
मॉर्निंग
पोस्ट
ने
अपनी
एक
रिपोर्ट
में
कहा
कि,
चीन
अब
अपने
जे-20
फाइटर
जेट
में
नये
WS-15
afterburning
turbofan
engine
लगाकर
टेस्ट
किया
है
और
ऐसा
करने
से
जे-20
की
क्षमता
में
इजाफा
हुआ
है,
जो
चीन
के
लिए
अच्छी
खबर
है।

चीन बनाम अमेरिका बनाम ब्रिटेन

चीन
बनाम
अमेरिका
बनाम
ब्रिटेन

साउथ
चायना
मॉर्निंग
पोस्ट
की
लेख
में
यह
भी
कहा
गया
था
कि,
चीन
J-20s
में
लगे
सभी
रूसी
AL-31F
इंजनों
को
घरेलू
WS-15
इंजनों
से
बदल
देगा,
जो
कि
अपने
जेट
इंजन
धातु
विज्ञान
और
निर्माण
विधियों
में
चीन
के
बढ़ते
विश्वास
का
संकेत
हो
सकता
है।
वहीं,
अमेरिकी
जनरल
मार्क
कैली
ने
नोट
किया
कि,
चीन
की
यह
कोशिश
उसे
पांचवीं
से
छठी
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमानों
के
निर्माण
की
तरफ
बढ़ने
की
इजाजत
दे
सकता
है।
इसके
विपरीत,
यूएस
और
यूके
की
छठी
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमान
कार्यक्रमों
का
लक्ष्य,
चीन
और
रूस
के
पांचवीं
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमानों
को
पीछे
छोड़ना
है।
वहीं,
जुलाई
2022
में
लिखे
गये
एक
लेख
में
यूके
एयर
चीफ
मार्शल
माइकल
विगस्टन
ने
जोर
देते
हुए
कहा,
कि
यूनाइटेड
किंगडम
मानव
रहित
विमान
और
नेक्स्ट
जेनरेशन
मानवयुक्त
प्लेटफॉर्म
का
निर्माण
कर
रहा
है,
जो
डिफेंस
इतिहास
में
गम
चेंजर
साबित
होगा।
उन्होंने
इस
बात
पर
जोर
देते
हुए
कहा
कि,यूके
का
छठी
पीढ़ी
का
लड़ाकू
कार्यक्रम
हथियारों,
वारजोन
कनेक्टिविटी
और
नेटवर्क
के
माध्यम
से
सूचना
को
कैसे
स्थानांतरित
किया
जाता
है,
इस
पर
जोर
देता
है।

अभी है पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का युग

अभी
है
पांचवीं
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमानों
का
युग

हालांकि,
छठी
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमान
बनाने
में
अभी
कुछ
सालों
का
वक्त
और
लगेगा,
लेकिन
अमेरिकी
वायुसेना
ने
पिछले
दिनों
दावा
किया
था,
कि
उसने
एक
ऐसे
प्रोटोटाइप
उड़ाया
है,
जो
मील
का
पत्थर
है
और
चीन
को
इसे
बनाने
में
अभी
कई
और
साल
लगेंगे।
आपको
बता
दें
कि,
पांचवीं
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमानों
के
निर्माण
में
भी
चीन
से
काफी
आगे
अमेरिका
है
और
अमेरिका
के
पास
इस
वक्त
पांचवीं
पीढ़ी
के
दो
विमान
हैं,
एक
लॉकहीट
मार्टिन
एफ-22
और
दूसरा
एफ-25।
वहीं,
चीन
के
पास
पांचवी
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमान
रूस
से
खरीदे
गये
हैं
या
फिर
रूसी
विमानों
के
कॉपी
हैं,
हालांकि
चीन
के
पास
मौजूद
चौथी
पीढ़ी
के
लड़ाकू
विमान
भी
काफी
शक्तिशाली
हैं
और
उन्हें
रडार
में
पकड़ा
नहीं
जा
सकता
है।
वहीं,
चीन
के
एडवांस
फाइटर
जेट्स
में
जे-15
के
अलावा
सुखोई-27,
सुखोई-30केके
और
सुखोई-35एस
भी
शामिल
है,
जिसे
चीन
ने
रूस
से
खरीदा
हुआ
है।

क्या चीन से काफी आगे है अमेरिका?

क्या
चीन
से
काफी
आगे
है
अमेरिका?

हालांकि,
चीन
अपने
फाइटर
विमानों
की
टेक्नोलॉजी
पर
काफी
तेजी
से
काम
कर
रहा
है,
लेकिन
अमेरिका
का
मानना
है,
कि
चीन
अभी
भी
उससे
कई
साल
पीछे
है।

वारज़ोन
में
सितंबर
के
एक
लेख
में,
पैसिफिक
फोर्स
के
अमेरिकी
वायु
सेना
के
प्रमुख
जनरल
केनेथ
विल्सबैक
ने
कहा
कि,
चीन
के
जे
-20
लड़ाकू
विमानों
का
बढ़ता
बेड़ा
ऐसा
कुछ
नहीं
है,
जो
अमेरिका
को
नींद
से
जागने
के
लिए
मजबूर
करे।
उन्होंने
यह
भी
नोट
किया
कि,
अमेरिका
बारीकी
से
देखता
है
कि
चीन
अपने
जे
-20
लड़ाकू
विमानों
को
कैसे
नियुक्त
करता
है।
चीन
के
मुकाबले
अमेरिका,
फाइटर
टेक्नोलॉ़जी
के
मामले
में
अपनी
टॉप
पॉजीशन
को
लेकर
आश्वस्त
रहता
है।
वहीं,
अमेरिकी
वायु
सेना
के
चीफ
ऑफ
स्टाफ
जनरल
चार्ल्स
ब्राउन
ने
चीन
के
J-20
को
नीचा
दिखा
दिया
और
उन्होंने
कहा
कि,चीनी
विमान
में
ऐसा
कुछ
खास
नहीं
है,
जिससे
इम्प्रेस
हुआ
जा
सके।
हालांकि,
उन्होंने
इस
बात
पर
जोर
दिया,
कि
जहां
अमेरिका
ने
इन
मुठभेड़ों
से
बहुत
कुछ
सीखा
है,
लेकिन
उन्होंने
ये
भी
कहा,
कि
जे-20
की
क्षमता
में
ऐसी
कोई
बात
नहीं
है,
जिसके
बारे
में
वह
बहुत
ज्यादा
चिंता
करेंगे।

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