नीतीश की UP में एंट्री की आहट से बढ़ी BJP की टेंशन, ये हैं वजहें | BJP’s tension increased due to Nitish’s entry in UP, these are the reasons

तो क्या यूपी के पटेल समुदाय पर नीतीश की नजर ?

तो क्या यूपी के पटेल समुदाय पर नीतीश की नजर ?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं भी कुर्मी समाज से आते हैं। यूपी में खासतौर से बिहार की सीमा से सटे कई जिलों में पटेलों की अच्छी खासी संख्या है। गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, इलाहाबाद और इसके आसपास के करीब एक दर्जन जिले ऐसे हैं जहां पटेल समुदाय निर्णायक भूमिका में होते हैं। पटेलों की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यूपी की विधानसभा में इस समय 30 से अधिक विधायक हैं। तो क्या यही आंकड़ा नीतीश को यूपी में आने के लिए प्रेरित कर रहा है। नीतीश को लगता है कि पटेल का बड़ा नेता बनकर इस समीकरण को आसानी से भुनाया जा सकता है।

फूलपुर उपचुनाव में बीजेपी को सपा ने दी थी मात

फूलपुर उपचुनाव में बीजेपी को सपा ने दी थी मात

पटेल समुदाय की एकजुटता का लाभ और नुकसान बीजेपी दोनों झेल चुकी है। जिस फूलपुर लोकसभा सीट से नीतीश कुमार के चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं वहां से अभी बीजेपी की सांसद केशरी देवी पटेल हैं। हालांकि एक समय ऐसा भी था कि इसी सीट पर उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को हार भी मिली थी। यह सीट कांग्रेस के गढ़ के तौर पर गिनी जाती थी। फूलपुर से पूर्व पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी जीत हासिल की थी। समय के साथ की कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती चली गई। बाद में इस सीट पर कभी सपा तो कभी बीजेपी को जीत मिली। फूलपुर पटेलों का गढ़ माना जाता है। यहां से सांसद बनना है तो पटेल समुदाय का विश्वास जीतना ही होता है।

सिराथू में केशव की हार पटेल की एकजुटता ही बनी

सिराथू में केशव की हार पटेल की एकजुटता ही बनी

पटेल समीकरण का असर विधानसभा चुनाव के दौरान भी दिखा था। विधानसभा चुनाव में कौशांबी जिले की सिराथू से योगी सरकार के बड़े चेहरे और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य चुनाव लड़े थे लेकिन सपा की उम्मीदवार पल्लवी पटेल ने केशव को धूल चटा दी। इसके पीछे पटेलों की एकजुटता ही थी। पटेलों की नाराजगी केशव पर भारी पड़ गई और जीत उनके हाथ से फिसल गई। केशव प्रसाद मौर्य का हारना विधानसभा चुनाव का एक बड़ा उलटफेर था। जेडीयू के एक पदाधिकारी ने बताया कि सिराथू में केशव का हारना एक बड़ा संदेश था। पटेल बदलाव चाहता है और सत्ता में भागीदारी भी। नीतीश कुमार इस समाज की आवाज बनकर उभरेंगे।

क्या पटेलों को लामबंद करना चाहते हैं नीतीश

क्या पटेलों को लामबंद करना चाहते हैं नीतीश

जेडीयू के नेताओं की माने तो नीतीश की नजर यूपी और उसमें भी खासतौर से पूर्वांचल के पटेल समुदाय पर है। पटेलों का नेता बनकर वो यूपी में एंट्री मार सकते हैं। जिस तरह मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव में दो जगहों से चुनाव लड़े थे उसी तरह नीतीश कुमार भी बिहार के साथ ही यूपी से भी चुनाव लड़ने का दांव खेल सकते हैं। जेडीयू के रणनीतिकारों को लगता है कि पीएम मोदी चूंकि काशी से चुनाव लड़ते हैं तो उससे सटे प्रयागराज के फूलपुर की सीट को चुनकर एक बड़ा संदेश दे सकते हैं। कुछ ऐसा ही संदेश मुलायम सिंह यादव ने भी दिया था जब वो मोदी की रणनीति को टक्कर देने के लिए मैनपुरी के साथ ही आजमगढ़ से भी चुनाव लड़े थे और दोनों जगहों से जीतने में भी सफल रहे थे।

बीजेपी के लिए क्या मुश्किलें पैदा करेंगे नीतीश

बीजेपी के लिए क्या मुश्किलें पैदा करेंगे नीतीश

नीतीश कुमार यूपी से लड़कर बीजेपी को कितना टेंशन दे पाएंगे अभी यह कहना मुश्किल हैं लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज कहते हैं कि नीतीश कुमार यदि ये दांव चलते हैं तो बीजेपी को दोबारा अपनी रणनीति पर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। क्योंकि पटेल समुदाय केशव जैसे चेहरे को चुनाव हराकर पहले ही अपनी मंशा स्पष्ट कर चुका है। हालांकि बीजेपी के पास भी कुर्मी बिरादरी के बड़े नेता हैं जिसमें स्वतंत्रदेव सिंह और उनकी सहयोगी अनुप्रिया पटेल शामिल हैं। लेकिन इन चेहरों के होते हुए नीतीश अपनी रणनीति में कितना सफल होंगे यह देखना दिलचस्प होगा।

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