‘हां, शायद कुछ यहूदी मारे गये थे..’, ईरानी राष्ट्रपति के बयान पर भड़का इजरायल, जानें क्या है होलोकॉस्ट? | Iranian president raisi’s comment on Holocaust sparks outcry in Israel know what is Holocaust

ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

ईरानी राष्ट्रपति ने इंटरव्यू में होलोकॉस्ट के सवाल पर कहा कि, ‘कुछ संकेत हैं, कि होलोकॉस्ट हुआ था, लेकिन लेकिन इस मुद्दे पर और अधिक रिसर्च और जांच करने की जरूरत है।” ईरानी राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को इजरायली अधिकारियों ने यहूदी विरोधी ‘होलोकॉस्ट को मानने से इनकार’ के रूप में निंदा की। वहीं, यह पूछे जाने पर, कि क्या उन्हें विश्वास है कि ये ‘प्रलय’ (लाखों यहूदी मारे गये थे) हुआ था? इब्राहिम रायसी ने कहा कि, “कुछ संकेत हैं कि यह हुआ।” उन्होंने आगे कहा कि, “यदि ऐसा है, तो उन्हें इसकी जांच और शोध करने की अनुमति देनी चाहिए।” ये इंटरव्यू प्रसारित होने के बाद पूरे इजरायल में बवाल मच गया, क्योंकि अभी भी इजरायल में 10 हजार से ज्यादा ऐसे लोग जीवित हैं, जो होलोकॉस्ट में बच गये थे, लेकिन उनके दिल में अभी भी वो दहशत बचा हुआ है। वहीं, इजराइल के आधिकारिक होलोकॉस्ट स्मारक केंद्र के अध्यक्ष, याद वाशेम ने रायसी को “घृणित यहूदी विरोधी” बताते हुए फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि, होलोकॉस्ट की घटना पर तनिक शक भी करना यहूदी घृणा का प्रदर्शन है।

इजरायल की सख्त प्रतिक्रिया

इजरायल की सख्त प्रतिक्रिया

वहीं, इजरायल के राष्ट्रपति यैर लैपिड, जिनके पिता उस खौफनाक होलोकॉस्ट से बच गये थे, उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति के इंटरव्यू के रीट्वीट करते हुए कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं और लिखा है, कि ‘कुछ संकेत।’ ये तस्वीरें होलोकॉस्ट की भयावहता को दिखाती हैं, जब जर्मनी में यहूदियों के ऊपर हिटलर ने प्रलय बरपाया था और लाखों यहूदियों को मार डाला गया था। वहीं, इजराइल के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत गिलाद एर्डन ने भी रायसी की टिप्पणियों को “चौंकाने वाला” बताया है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से अपील की है, ‘विरोधीवाद और घृणा’ फैलाने के लिए ईरानी राष्ट्रपति को वैश्विक मंच नहीं दिया जाए।

ईरान-इजरायल में खराब संबंध

आपको बता दें कि, ईरानी राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र में अपना संबोधन देने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं और वैश्विक नेताओं की वार्षिक सभा में उनकी पहली उपस्थिति होने वाली है। इब्राहिम रायसी पिछले साल ईरान के राष्ट्रपति चुने गये थे, जो अपने पश्चिम विरोध और अति-रूढ़िवाद के लिए जाने जाते हैं। वहीं, इजराइल, ईरान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन और खतरा मानता है। ईरान ने लंबे समय से इजरायल के विनाश के लिए प्रतिबद्ध सशस्त्र समूहों के निर्माण का समर्थन किया है और ईरान परमाणु बम भी बनाना चाहता है, ताकि वो इजरायल पर हमेशा के लिए प्रेशर बना सके।

क्या है होलोकॉस्ट?

क्या है होलोकॉस्ट?

‘होलोकॉस्ट’ शब्द प्राचीन ग्रीक से आया है और इसका अर्थ है ‘जला हुआ बलिदान’। द्वितीय विश्व युद्ध से पहले भी, इस शब्द का इस्तेमाल कभी-कभी लोगों के एक बड़े समूह की मृत्यु का वर्णन करने के लिए किया जाता था, लेकिन 1945 के बाद से, यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोपीय यहूदियों की हत्या का पर्याय बन गया है। इसलिए यहूदियों के खिलाफ ‘प्रलय’ दिखाने के लिए होलोकॉस्ट शब्द का प्रयोग किया जाता है। यहूदी इसे ‘शोआ’ शब्द से भी संदर्भित करते हैं, जो ‘तबाही’ को दिखाने के लिए हिब्रू शब्द है। द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नाजी हिटलर पूरी दुनिया से यहूदियों का सफाया कर देना चाहता है और अपनी इस सनक के लिए हिटलर ने लाखों यहूदियों को मरवा दिया था। जून 1941 में, जर्मनी ने सोवियत संघ पर आक्रमण किया था और हिटलर ने जर्मनी के वैचारिक दुश्मन, साम्यवादी शासन पर विनाश के युद्ध की घोषणा की थी और इस दौरान हिटलर के आदेश पर रूस में रहने वाले करीब 9 लाख यहूदियों को मरवा दिया गया था। यहूदियों को या तो लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया गया था और फिर हजारों यहूदियों को एक सुनसान जगह पर कैद कर भूख से तड़पा-तड़पाकर मारा गया था। रूस में आज भी यहूदियों की सैकड़ों शव खुदाई के दौरान कब्र से निकलते रहते हैं।

हिटलर का गैस चेंबर

हिटलर का गैस चेंबर

1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध का आगाज होने के बाद हिटलर ने ‘फाइनल सोल्यूशन’ की घोषणा की थी, यानि यहूदियों का नामो-निशान मिटाने का ऐलान कर दिया था और यूरोपीय यहूदियों को पकड़-पकड़कर कैंप में लाया गया। रिपोर्ट्स से पता चलता है, कि ऑश्वित्ज के नाजी होलोकॉस्ट सेंटर पर यूरोपीय यहूदियों को पकड़कर हिटलर की फौज लाती थी और फिर उन्हें वहां पर कैद करके रखा जाता था। यहां पर जो यहूदी काम करने लायक होते थे, उनसे जानवरों की तरह काम करवाया जाता था और जो भी यहूदी बूढ़े या फिर अपंग होते थे, उन्हें गैस चेंबर भेज दिया जाता था। वहीं, इन यहूदियों का कोई अस्तित्व ही ना रहे, इसके लिए उनके तमाम दस्तावेज नष्ट कर दिए जाते थे और जिन्हें पकड़कर लाया जाता था, उनके हाथ पर निशान बना दिया जाता था। गैस चेंबर में मारने के बाद यहूदियों को गैस चेंबर के बगल में इलेक्ट्रिक चिता का निर्माण किया गया था और फिर उन्हें जला दिया जाता था।

हिटलर देता था भयानक यातनाएं

हिटलर देता था भयानक यातनाएं

नाजी कैंप में यहूदियों से अत्याचार की सभी हदें पार कर दी गईं थीं और हिटलर के सैनिक उन्हें खतरनाक से खतरनाक यातनाएं देते थे। यहूदियों के बाल उखाड़ लिए जाते थे और उतना ही खाना दिया जाता था, ताकि वो जिंदा रह सकें। यूरोप में काफी ज्यादा सर्दी पड़ती है, लेकिन यहूदियों को यातना कैंप में नंगा रखा जाता था और यातना कैंप के अंदर किसी भी कैदी को मारा भी जाता था, तो सार्वजनिक तौर पर, ताकि बाकी के सभी यहूदी उस खौफनाक दृश्य को देख सकें। यानि, हिटलर ने मानवीयता की सभी हदों को तोड़ डाला था। नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी यानि नाजी पार्टी के नेतृत्व का कहना था, कि दुनिया से यहूदियों को मिटाना जर्मनी के साथ साथ पूरी दुनिया के लोगों के लिए फायदेमंद होगा। जबकि, यहूदियों की तरफ से उन्हें किसी भी तरह की ना तो दिक्कत थी और ना ही कोई खतरा। लेकिन, हिटलर ने लिंग और उम्र की परवाह किए बगैर यहूदियों को मारा और उसे ही होलोकॉस्ट कहा जाता है, जिसके ऊपर ईरान के राष्ट्रपति ने शक जताया है और जांच की मांग की है।

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