IIT Bhilai को विकसित करने में प्रो. रजत मूना का रहा योगदान, नए निदेशक के सामने होगी नई चुनौतियां | In developing IIT Bhilai, Prof. Rajat Moona’s contribution, new challenges will be in front of the new director

प्रो मूना सी-डेक के रह चुके हैं महानिदेशक

प्रो
मूना
सी-डेक
के
रह
चुके
हैं
महानिदेशक

प्रो.मून
आईआईटी
भिलाई
के
निदेशक
से
पहले
सी-डेक(Centre
for
Development
of
Advanced
Computing
Bangalore)
के
महानिदेशक
रह
चुके
हैं।
आईआईटी
गांधीनगर
में
प्रो.मूना
आईआईटी
कानपुर
के
प्रोफेसर
थे।
वे
1991
से
आईआईटी
कानपुर
में
कंप्यूटर
साइंस
एंड
इंजीनियरिंग
के
प्रोफेसर
हैं।
उन्होंने
आईआईटी
कानपुर
से
ही
वर्ष
1981-85
के
दौरान
इलेक्ट्रिकल
इंजीनियरिंग
में
बीटेक
किया।
फिर
वर्ष
1985-89
तक
आईआईएस
बेंगलुरू
से
कंप्यूटर
साइंस
में
पीएचडी
की

IIT भिलाई को विकसित करने में रहा योगदान

IIT
भिलाई
को
विकसित
करने
में
रहा
योगदान

छत्तीसगढ़
में
साल
2017
में
IIT
की
स्थापना
के
बाद
प्रो.
रजत
मूना
आईआईटी
भिलाई
के
पहले
निदेशक
थे।
जिन्होंने
सीमित
संसाधनों
में
आईआईटी
भिलाई
की
शुरुआत
की
और
संस्थान
को
आगे
बढ़ाया।
इसके
साथ
ही
उन्होंने
कई
उपलब्धियां
भी
हासिल
की।
प्रोफेसर
रजत
मुना
के
कार्यकाल
में
उनके
अथक
प्रयासों
से
नए
पाठ्यक्रम
और
ब्रांचेस
शुरू
किए
गए।
आईआईटी
भिलाई
के
नवीन
भवन
की
सौगात
मिली।
नए
IIT
भवन
के
डिजाइन
उन्होंने
अपने
देखरेख
में
तैयार
करवाया।
जिसके
बाद
साल
2019
में
आईआईटी
भिलाई
की
नींव
रखी
गई।
IIT
भिलाई
के
कंस्ट्रक्शन
प्रोजेक्ट
ग्रीन
बिल्डिंग
के
लिए
GRIHA
ने
IIT
Bhilai
को
5
स्टार
रेटिंग
दिया।

शोध एवं अनुसंधान में दिया जोर, 500 शोध पत्र हुए प्रकाशित

शोध
एवं
अनुसंधान
में
दिया
जोर,
500
शोध
पत्र
हुए
प्रकाशित

प्रोफेसर
रजत
मूना
ने
अपने
इन
5
सालों
में
आईआईटी
भिलाई
को
पहचान
दिलाने
में
महत्वपूर्ण
योगदान
दिया।
उनके
नेतृत्व
में
IIT
भिलाई
में
शिक्षा
और
अनुसंधान
क्षेत्र
में
सबसे
अधिक
कार्य
किए
गए।
IIT
में
एडमिशन
की
सीटें
बढाकर
छात्रों
की
संख्या
बढ़ाने
में
उनका
महत्वपूर्ण
योगदान
रहा।
जिसके
परिणाम
स्वरूप
छात्र
संख्या
115
से
बढ़कर
आज
लगभग
900
हो
चुकी
है।
इसके
साथ
ही
छात्रों
के
500
से
अधिक
शोधपत्र
प्रकाशित
हो
चुके
हैं।
आईआईटी
भिलाई
के
दो
दीक्षांत
समारोह
इनके
कार्यकाल
में
संपन्न
कराए
गए।
जिसमें
500
से
भी
अधिक
छात्रों
को
उपाधि
प्रदान
की
गई।
प्रो.
मूना
ने
डेटा
साइंस
और
मेकेट्रोनिक्स
जैसे
नए
कोर्सेस
की
शुरुआत
की।
20
से
अधिक
स्टार्टअप
युवाओं
द्वारा
चलाए
जा
रहे
हैं।
इसके
साथ
ही
25
राष्ट्रीय

अंतरराष्ट्रीय
कंपनियों

शैक्षणिक
संस्थानों
के
साथ
एमओयू
पर
हस्ताक्षर
किए
गए
हैं।
आईआईटी
भिलाई
के
इंस्टिट्यूट
इनोवेशन
काउंसिल
को
एमएचआरडी
द्वारा
4
स्टार
रैंकिंग
दिया
गया
है।

इन क्षेत्रों में दिया विशेष योगदान

इन
क्षेत्रों
में
दिया
विशेष
योगदान

प्रो.
मूना
ने
स्मार्ट
कार्ड
ड्राइविंग
लाइसेंस,
ई-पासपोर्ट,
व्हीकल
रजिस्ट्रेशन,
इलेक्ट्रोनिक
टोल
कलेक्शन,
इलेक्ट्रोनिक
वोटिंग
मशीन
(ईवीएम),
वीवीपैट
जैसी
एप्लीकेशन
के
विकास
और
उसे
परिभाषित
करने
में
अहम
भूमिका
निभाई
है।
इन्हें
राष्ट्रीय
और
अंतरराष्ट्रीय
स्तर
पर
कई
अवार्ड
भी
प्रदान
किए
गए
हैं।

नए निदेशक के सामने होंगी यह चुनौतियां

नए
निदेशक
के
सामने
होंगी
यह
चुनौतियां

भिलाई
आईआईटी
के
नए
निदेशक
प्रोफेसर
राजीव
प्रकाश
के
सामने
फिलहाल
पुराने
आईआईटी
भिलाई
के
सेजबहार
कैंपस
से
भिलाई
के
कुटेला
भाटा
में
बन
रहे
आईआईटी
कैंपस
में
शिफ्टिंग
के
बाद
व्यवस्थापन
की
जिम्मेदारी
होगी।
इसके
साथ
साथ
सुनियोजित
व्यवस्था
करते
हुए
शिक्षण
कार्य
एवं
प्रशासनिक
कार्य
प्रारंभ
कराना
होगा।
इसके
साथ
ही
आईआईटी
में
छात्रों
के
शोध
एवं
अनुसंधान
के
साथ-साथ
प्लेसमेंट
और
जॉब
सिक्योर
बनाने
वाले
कोर्स
की
शुरुआत
करना,
मटेरियल
साइंस
के
प्रोफेसर
होने
के
नाते
बी
टेक
और
एम
टेक
की
शुरुआत
करना,
प्रोफेसर

अन्य
स्टाफ
की
नियुक्तियां
कर
छात्रों
को
लाभ
दिलाने
जैसी
नई
जिम्मेदारी
प्रो.
राजीव
प्रकाश
पर
होगी।
आईआईटी
भिलाई
में
छात्रों
के
लिए
एक
समावेशी
और
शैक्षणिक
वातावरण
तैयार
करना
एक
बड़ी
जिम्मेदारी
निदेशक
पर
है।

राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू ने जारी किया आदेश

राष्ट्रपति
द्रौपती
मुर्मू
ने
जारी
किया
आदेश

राष्ट्रपति
द्रौपदी
मुर्मू
ने
प्रो.
मूना
समेत
देश
के
8
भारतीय
प्रौद्योगिकी
संस्थानों
के
निदेशक
की
नियुक्ति
का
आदेश
मानव
संसाधन
विकास
मंत्रालय
की
ओर
से
19
सितम्बर
को
जारी
किया
है।
उनके
स्थान
पर
बीएचयू
कें
प्रोफेसर
राजीव
प्रकाश
को
भिलाई
IIT
की
जिम्मेदारी
दी
गई
है।
प्रो.सुधीर
जैन
को
बनारस
हिंदू
विश्वविद्यालय
(बीएचयू)
का
कुलपति
बनाए
जाने
के
बाद
गाँधीनगर
IIT
निदेशक
का
पद
रिक्त
था।
जिसमें
प्रो.मूना
की
नियुक्ति
की
गई।
इसके
साथ
ही
दो
निदेशकों
को
उनके
स्थान
पर
यथावत
रखा
गया
है।

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